देशभर में ई-स्कूटर से जुड़ी दुर्घटनाओं और मौतों में तेजी से हो रही वृद्धि ने विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। उन्होंने सरकारों से अपील की है कि वे तत्काल प्रभाव से नियमों और सुरक्षा उपायों में सुधार करें ताकि इन घटनाओं को रोका जा सके और सवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों और ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में ई-स्कूटर दुर्घटनाओं के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें सिर की गंभीर चोटों, हड्डियों के टूटने और कभी-कभी जान जाने तक के मामले सामने आ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियन मेडिकल एसोसिएशन (AMA) ने इस संबंध में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सख्त हेलमेट कानून, स्पीड लिमिट और लाइसेंसिंग सिस्टम लागू नहीं किए गए तो हालात और भी खराब हो सकते हैं।
कई राज्यों में ई-स्कूटरों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरी क्षेत्रों में, जहां लोग ट्रैफिक से बचने के लिए इनका सहारा ले रहे हैं। लेकिन अधिकतर सवार बिना हेलमेट और उचित प्रशिक्षण के सड़कों पर उतर रहे हैं, जिससे न केवल उनकी जान को खतरा है, बल्कि अन्य राहगीरों की सुरक्षा भी दांव पर है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ई-स्कूटर पर सवार होने वालों के लिए अनिवार्य हेलमेट पहनने का नियम हो, ड्राइविंग के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित की जाए और स्पीड पर सख्त नियंत्रण लागू किया जाए।
सरकारों से अपील की जा रही है कि इस बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं ताकि भविष्य में ई-स्कूटर एक सुरक्षित परिवहन विकल्प बन सके।