मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी बोले – "बॉलीवुड में कैंप-कल्चर, टैलेंट सीमित हो गया है"

मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी बोले – "बॉलीवुड में कैंप-कल्चर, टैलेंट सीमित हो गया है"

बॉलीवुड के महानायक मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी चक्रवर्ती ने एक बार फिर इंडस्ट्री की हकीकत बयां की है। अपने पिता के नाम और पहचान के बावजूद नमाशी का फिल्मी सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने 2023 में राजकुमार संतोषी निर्देशित बैड बॉय से डेब्यू किया, लेकिन यह फिल्म दर्शकों पर कोई खास असर नहीं छोड़ पाई। अब वह निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की बहुचर्चित फिल्म द बंगाल फाइल्स में एक नकारात्मक किरदार निभाते नजर आएंगे। इस फिल्म में उनके पिता मिथुन चक्रवर्ती और भाभी मदलसा शर्मा भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखेंगे।


"आज इंडस्ट्री कुछ गिने-चुने लोगों के हाथ में"

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में नमाशी ने खुलकर कहा कि इंडस्ट्री में अब प्रतिभा से ज्यादा "कैंप-कल्चर" हावी है। उन्होंने कहा—
"पहले के समय में अगर आपके पास पोटेंशियल था तो आप स्टार बन सकते थे—मिथुन, गोविंदा या अक्षय की तरह। लेकिन आज हालात बदल गए हैं। अब बड़े प्रोडक्शन हाउस ही सब तय करते हैं। उनसे मिलने पर साफ कहा गया कि पहले मीडिया में फेमस बनो, लिंक-अप की खबरें फैलाओ, फिर फिल्म बनेगी। मैंने यह शर्त मानने से इंकार कर दिया।"

उन्होंने बताया कि एक फिल्म में उन्हें लेने की बजाय किसी और स्टारकिड को कास्ट किया गया, लेकिन वह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई।


"फादर ने भी कभी कैंप नहीं जॉइन किया"

नमाशी ने कहा कि वह जान-बूझकर किसी कैंप का हिस्सा नहीं बने।
"मेरे पिता ने कभी किसी कैंप से नाता नहीं जोड़ा। उन्होंने 380 से ज्यादा फिल्में कीं। आज कोई अभिनेता 30 फिल्म कर ले तो बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लेकिन मौजूदा कैंप-कल्चर में असली टैलेंट दब जाता है। इंडस्ट्री में मीडियोकर टैलेंट नजर आता है, चुनौतीपूर्ण कलाकार कम हो गए हैं।"


"बंगाल फाइल्स" में नेगेटिव रोल

नमाशी अब 5 सितंबर को रिलीज होने जा रही द बंगाल फाइल्स में नजर आएंगे। खास बात यह है कि इस फिल्म में वह खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। खुद को चुनौतीपूर्ण किरदारों में आज़माने के इच्छुक नमाशी मानते हैं कि यही रास्ता उनके लिए असली पहचान बनाएगा।


👉 यह साफ है कि मिथुन दा के बेटे होने के बावजूद नमाशी का सफर संघर्ष भरा है। वह खुले तौर पर मानते हैं कि इंडस्ट्री में "कैंप-कल्चर" टैलेंट के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा है।