7 अक्टूबर पर ऑस्ट्रेलिया में विवाद — प्रधानमंत्री बोले, “यह दिन प्रदर्शन का नहीं, संवेदना का है”

7 अक्टूबर पर ऑस्ट्रेलिया में विवाद — प्रधानमंत्री बोले, “यह दिन प्रदर्शन का नहीं, संवेदना का है”

सिडनी / मेलबॉर्न, 7 अक्टूबर 2025 — इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष की पहली बरसी से पहले ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनेज़ ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि 7 अक्टूबर का दिन “विरोध प्रदर्शन का नहीं, बल्कि याद और शोक का दिन” होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिन पर प्रस्तावित प्रो-फिलिस्तीन रैलियाँ “गहरी भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती हैं” और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचा सकती हैं।


🔹 सरकार का सख्त रुख

प्रधानमंत्री अल्बनेज़ ने कहा कि पिछले वर्ष (7 अक्टूबर 2024) हुए हमास हमले की याद अब भी ताज़ा है, जिसमें इज़राइल में सैकड़ों लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा,

“यह दिन उन निर्दोष लोगों को याद करने का है जो आतंक के शिकार हुए। ऐसे समय में किसी भी तरह के राजनीतिक प्रदर्शन से बचना चाहिए।”

न्यू साउथ वेल्स (NSW) के मुख्यमंत्री क्रिस मिन्स और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि अगर किसी ने हिंसा, नफरत या प्रतिबंधित प्रतीकों का इस्तेमाल किया, तो कड़ी कार्रवाई होगी।
पुलिस ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और संभावित टकराव की आशंका है, इसलिए रैलियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।


⚖️ कानूनी जंग: अदालत में याचिका

NSW पुलिस ने सिडनी ओपेरा हाउस के बाहर होने वाली Stand4Palestine और Palestine Action Group की रैली को रोकने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
यह तर्क दिया गया कि यह प्रदर्शन “संभावित रूप से उकसाने वाला” है और यह पब्लिक ऑर्डर एक्ट का उल्लंघन कर सकता है।
यह मामला इस समय अदालत में विचाराधीन है।

यह पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया में प्रो-फिलिस्तीन रैलियाँ विवादों में आई हों। पिछले वर्ष भी सिडनी में इसी स्थान पर प्रदर्शन हुआ था, जहाँ कुछ लोगों ने हेज़बुल्ला जैसे प्रतिबंधित संगठनों के प्रतीक लहराए थे। इस पर यहूदी समुदाय ने गहरी आपत्ति जताई थी और सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग की थी।


📢 विरोधियों की प्रतिक्रिया: “यह लोकतंत्र की आवाज़ है”

प्रदर्शन आयोजकों ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि वे मुक्त अभिव्यक्ति के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
Palestine Action Group की प्रवक्ता ने कहा,

“हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि हम निर्दोष फ़िलिस्तीनी लोगों के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। शांति की बात करना अपराध नहीं हो सकता।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को “राजनीतिक रूप से दबाने” की कोशिश कर रही है।
कई मानवाधिकार समूहों ने भी कहा कि लोकतांत्रिक समाज में असहमति का अधिकार आवश्यक है, बशर्ते कि यह शांतिपूर्ण रहे।


🕊️ समाज में बढ़ती संवेदनशीलता

7 अक्टूबर की तारीख़ ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रतीकात्मक बन चुकी है। एक ओर यह इज़राइल में हुए आतंकवादी हमले की याद दिलाती है, वहीं दूसरी ओर फ़िलिस्तीनियों के प्रति मानवीय संवेदना को भी जगाती है।
लेकिन इसी दोहरी भावनाओं ने समाज को बाँट दिया है —
यहूदी समुदाय इसे “दुख और स्मरण का दिन” मानता है, जबकि फिलिस्तीन समर्थक समूह इसे “न्याय और प्रतिरोध का प्रतीक” बताते हैं।

सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद ऑस्ट्रेलिया की बहुसांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक संतुलन की परीक्षा है।
सवाल यह है कि — क्या “मुक्त अभिव्यक्ति” और “सामाजिक संवेदना” के बीच कोई मध्य मार्ग संभव है?


🔸 निष्कर्ष

सरकार की अपील स्पष्ट है — 7 अक्टूबर को कोई भी राजनीतिक रैली या प्रदर्शन न किया जाए।
प्रधानमंत्री अल्बनेज़ ने कहा,

“हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी समुदाय को असुरक्षित महसूस न हो। लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब हम एक-दूसरे की पीड़ा को समझें।”

रैलियों के आयोजकों ने अब भी अपने कार्यक्रमों को जारी रखने की घोषणा की है। अदालत का निर्णय आने तक देशभर की नज़रें सिडनी और मेलबॉर्न पर टिकी हुई हैं।