ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एफबीआई निदेशक काश पटेल से गुप्त मुलाकात को लेकर उठे विवाद पर सफाई देनी पड़ी है। यह बैठक पिछले रविवार को सिडनी में हुई, जिसमें ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (AFP) के आयुक्त रीसे किर्शॉ भी शामिल थे।
इस बैठक का खुलासा गुरुवार को हुआ, जिसके बाद ग्रीन्स पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। आलोचना इसलिए हुई क्योंकि काश पटेल ने अमेरिकी कैपिटल पर 6 जनवरी 2021 को हुए हमले में शामिल लोगों को 'राजनीतिक कैदी' बताया था और उनके परिवारों के लिए फंडिंग भी की थी।
लेकिन शुक्रवार को ABC रेडियो पर बात करते हुए बर्क ने कहा, "कुछ सुरक्षा कारणों से, यह जरूरी होता है कि कुछ बैठकों को उस समय सार्वजनिक न किया जाए। मैं हर बार मीडिया विज्ञप्ति जारी नहीं करता जब मैं किसी विदेशी समकक्ष से मिलता हूं।"
बर्क ने इस बैठक को 'सार्थक और रचनात्मक' बताया और कहा, "हमारे बीच हुई चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि हम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए किन-किन तरीकों से सहयोग कर सकते हैं। मुझे अमेरिका के साथ सहयोग को लेकर पूरा भरोसा है।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काश पटेल की राजनीतिक मान्यताएं कुछ भी हों, ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा सर्वोपरि है। “अमेरिका के साथ हमारा सहयोग आतंकवाद विरोध, बाल सुरक्षा, और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने जैसे क्षेत्रों में बेहद अहम है। कई ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ऐसे हैं जो इस सहयोग की वजह से आज जीवित हैं।”
टोनी बर्क ने अंत में यह भी कहा, "जब बात ऑस्ट्रेलियाई लोगों की सुरक्षा की हो, तब मैं कभी भी दूसरे देश की राजनीति में उलझकर कोई जोखिम नहीं लेता।"